प्रवास में (Pravas Mein)

By उषा राजे सक्सेना (Usha Raje Saxena)

$7.00

Description

कहानीकार का संवेदन संस्कार के रूप में अपने परिवेश को ग्रहण करता है । वह उसी में जीता है, साँस लेता है । प्रवासी लेखक अपने घर-परिवार, देश और मिट्टी से अलग होकर एक अन्य देश-काल और परिवेश में चला जाता है । वहाँ उसके नए संस्कार बनते हैं, नए दृष्टिकोण बनते हैं । माहौल बदल जाने से उसकी जिंदगी में बहुत सी पेचीदगियों आ जाती हैं । उसकी मान्यताएँ बदलने लग जाती हैं । यहीं द्वंद्व के आरंभ का प्रारंभ होता है । और यहीं कहानियाँ जन्म लेती हैं ।..
ये कहानियों भारतीय मूल्यों और मान्यताओं के चौखटे में संभवतः सही नहीं बैठेंगी; परंतु इन मूल्यों और मान्यताओं कै कारण ही एक परिवेश का साहित्य दूसरे परिवेश के साहित्य से अलग नहीं हो जाता । इन कहानियों के भीतर रिसी हुई गहरी मानवीय संवेदना उन्हें एक – दूसरे से जोड़े रखती है । सात समंदर पार होने पर भी यही मानवीयता इन कहानियों को समयातीत, कालेतर और समयसापेक्ष बनाती है ।

Additional information

Weight 325 oz
Language

Hindi