विविध घरानोंकी समन्वित गायकी (Vividh Gharanonki Samanvit Gayaki)

By डॉ. प्रतिभा शर्मा (Dr. Pratibha Sharma)

$8.14

Description

प्राचीन समय से एक वेगवान प्रवाह के रूप में चलती आ रही संगीत की गायन सरिता में कई तरह के मोड़ आए तो प्रबन्ध, धुपद, धमार, ख्याल, टप्पा, ठुमरी, गीत, ग़ज़ल व भजन इत्यादि शास्त्रीय, उप शास्त्रीय अथवा सुगम संगीत के रूप में जाने गए। इनमें से ख्याल गायन शैली एक ऐसा मोड़ था, जहां पर इस संगीत में सरिता ने अन्य छोटी-छोटी धाराओं में प्रवाहित होना शुरू कर दिया, जिन्हें आज हम संगीत के घराने कहते हैं। घराना शब्द संगीत में विशिष्ट अर्थ से प्रयुक्त होता है। संगीत के ख्याल गायन शैली में एक विशिष्ट ढंग की गायन प्रणाली के अर्थ में यह शब्द प्रयुक्त होता है। शास्त्रीय संगीत में ग्वालियर, आगरा, जयपुर-अतरौली, किराना, पटियाला और दिल्ली इत्यादि कई प्रसिद्ध घराने अपनी गायकी प्रस्थापित कर चुके हैं।

वैसे तो प्रत्येक घराने की गायकी स्वतंत्र और सौन्दर्यपरख है l ‘घराना’ एक प्रवाहमय धारा है जो निरन्तर बहती चली आ रही है व समय के साथ उसमें भी कुछ परिवर्तन होता आ रहा है। अतः समय के साथ संकीर्णता की दीवारें डह गई और वैचारिक परिवर्तन हुए। अनेक कलाकारों ने एक घराने की शुद्ध गायकी के कड़े नियमों एवं सिद्धान्तों में बंधे रहने की अपेक्षा अन्य घरानों की सौन्दर्यात्मक विशिष्टताओं को भी आत्मसात किया। संगीत के प्रति समर्पित अध्ययनरत कुछ कलाकारों ने संगीत की प्रवाहमय धारा में एक की अपेक्षा अन्य घरानों से भी शिक्षा प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त किया व घरानेदार परम्परा में नवीनता लाई।

Additional information

Weight 295 oz
Language

Hindi