कंकड़ी (Kankadi)

By मनमोरा जाफा (Manorma Jafa)

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Description

जीवनसाथी की सबसे ल्यादा ज़रूरत जीवन-सोया के समय होती है । उम को ढलान का एकाकीपन जीवन का सबसे यतिन दौर होता है। ककेडाँकै नायक आनन्द सिन्हा एक विधुर हैं । पत्नी की मृत्यु के बाद वे जीवन में रीतापन अनुभव करते हैं जिसे दूर करना उन्हें अत्यंत प्रेम करने वाले परिवार के लिए भी संभव नहीं । प्रकृति के सानिध्य में मन की शांति तलाशने वे मनाली जाते हैं, लेकिन वहां कुछ ऐसा घटित हो जाता है जो उन्हें एक बार फिर दोराहे यर ला खडा करता है । लेखिका मनोरमा ज़फा का पहला ही उपन्यास ‘देविका’ हिंदी निदेशालय के साहित्य कृति सम्मान 2007 से सम्मानित हुआ । इसके अतिरिक्त उनका एक कहानी-संग्रह और दो उपन्यास भी प्रकाशित हो चुने हैं । विभिन्न पत्र-यत्रिकाओं में कहानियों लिखने चाली लेखिका का हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओँ पर समान अधिकार है ।

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