
Dr. Vidyadhar Oke (डॉ. विद्याधर ओक)
लेखक डॉ.विद्याधर ओक का परिचय१) चिकित्सा क्षेत्र :- डॉ.विद्याधर गोपाल ओक ने मुंबई विद्यापीठ से एम.बी.बी.एस. तथा एम.डी. (औषधि शास्त्र) की उपाधि प्राप्त की। तत्पश्चात् आपका इस क्षेत्र में उच्च अध्ययन लंदन वेलकम फोंडेशन, लंदन बिजनेस स्कूल तथा अमेरिका की नार्थ कॅरोलिना की ड्यूक विश्वविद्यालय से हुआ। आप भारतीय औषधि के क्षेत्र में लगातार २८ वर्ष कार्यरत रहे है। वोखार्ड, ग्लॅक्सो, बरोज वेलकम तथा निकोलास पिरामल कंपनियो में आपने 'मेडिकल डायरेक्टर' व 'प्रेसिडेंट' के पद को सुशोभित किया। आपने भारत में २५ नयी औषधि के साथ ही साथ करीब १००० उत्पादनां को पंजीबद्ध किया। आपने चिकित्सा क्षेत्र में करीब १०० शोधपत्र देश-विदेश में प्रसिद्ध हुए। मुंबई विद्यापीठ के औषधि शास्त्र के बोर्ड ऑफ स्टडीज तथा आंतरराष्ट्रीय औषधी शास्त्र के उत्पादन संधारण के विशेषज्ञ के रुप में आपने भी कार्य किया। २) संगीत क्षेत्र :- डॉ.विद्याधर ओक ने हार्मोनियम वादक के रुप में अपने परिवार में सतत तीसरी पीढ़ी का निर्वाहन किया। आपने सुप्रसिद्ध हार्मोनियम वादक पं.गोविन्दराव पटवर्धन से २५ वर्ष हार्मोनियम की शिक्षा प्राप्त की। सन १९७२ में मुंबई दूरदर्शन पर स्वतंत्र हार्मोनियम वादन से अपनी संगीत यात्रा प्रारंभ की। सन १९७८ में आपको सुरसिंगार परिषद ने 'सुरमणी' की उपाधि प्रदान की। मुंबई दूरदर्शन के लगभग १५० कार्यक्रम तथा देश के शीर्ष व गुणी कलाकारों के गायन के साथ हार्मोनियम की संगति की। आपने सुप्रसिद्ध गायिका माणिक वर्मा के साथ १९८७ में अमरिका के दौरे पर २२ संगीत सभाओं में शिरकत की। उसी प्रकार सुप्रसिद्ध गायक स्व.डॉ.वसंतराव देशपांडे एवं सुप्रसिद्ध स्वरकोकिला आशा भोसले के नाट्यसंगीत के साथ हार्मोनियम की संगति की। विश्व की पहली '२२ श्रुति हार्मोनियम' और '२२ श्रुति मेटलोफोन' इन नये वाद्यों के निर्माण का महान कार्य किया। इसके अलावा 'म्युजिकल फ्रिक्वेंसी ॲनलायझर' से संगीत उपयोगी उपकरण को भी बनाया। तथा २२ श्रुति की तांत्रिक गणितीय व सांगीतिक जानकारी सारे संसार में प्रसारित करने हेतु 22 shruti.com वेबसाइट तथा २२ श्रुति संस्था के रुप में संसार की पहली शिक्षण संस्था को प्रारंभ किया। ३) ज्योतिष्य शास्त्र :- डॉ.ओक एक कुशल ज्योतिष्य एवं इस शास्त्र के ज्ञाता भी है। एवं उनके ठाणे स्थित कार्यालय से भविष्य निर्माण सलाहकार के रुप में कार्य करते है। उनका 'मनोरंजक स्वभावशास्त्र' व 'मित्र जिवाचा' यह पुस्तके उल्लेखनीय है।- डॉ.विद्याधर गोपाल ओक

