$15.99
Genre
Literature
Language
Hindi
Publisher
Rajpal & Sons
Publication date
1 January 2011
ISBN
9789350641484
डॉ. मुल्कराज आनंद की गणना 20वीं सदी के उन महान भारतीय लेखकों में की जाती है जिन्होंने अंग्रेजी में लिखते हुए भी देशी सरोकारों को नहीं भुलाया और चाय बागानों मे काम करनेवाले मजदूरों, कुलियों, अछूतों को अपने लेखन का विषय बनाया। इस दृष्टि से उन्हें चार्ल्स डिकेंस और प्रेमचंद की लीक का साहित्यकार माना जाता है। 1930 के दशक के शुरू में इंग्लैंड प्रवास में 'प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन' की स्थापना की और उसे अपना समर्थन तथा सहयोग देने के लिए प्रेमचंद को प्रेरित किया। डॉ. आनंद अपनी अंतिम सांस तक पी. आर ए. से जुड़े रहे। अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के कला-मर्मज्ञ के रूप में भी डॉ. आनंद का महत्व अक्षुण्ण है। अनेक दशकों तक उन्होंने भारतीय कला की अनूठी पत्रिका 'मार्ग' का संपादन किया और भारतीय संस्कृति एवं कला से संबंधित कई ग्रंथों की रचना की। वे सही मायनों में भारतीय साहित्य, संस्कृति और सामाजिक जीवन के शताब्दी पुरुष थे। पूरी सदी जी कर उन्होंने अंतिम सांस ली। 'कुली', 'अनटचेबल', 'टू लीव्स एंड ए बड' उनके महत्वपूर्ण उपन्यास हैं।
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