₹230.00
MRPGenre
Literature
Print Length
208 pages
Language
Hindi
Publisher
Rajpal & Sons
Publication date
1 January 2018
ISBN
9788174831613
प्रेमचंद निस्संदेह हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार थे जिनकी गणना विश्वस्तरीय साहित्यकारों में होती है। अपने जीवनकाल में उन्होंने 250 से अधिक कहानियाँ लिखीं जो मुख्यतः उस समय के समाज के यथार्थ को दर्शाती हैं। इनमें बालविवाह, गरीबी, भुखमरी, ज़मींदारों के अत्याचार के खिलाफ एक जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है। यथार्थ की इन सच्चाईयों से रू-ब-रू कराती कहानियों को पढ़ते हुए पाठक पूरी तरह से खो जाता है। ये कहानियाँ आज भी उतनी ही सामयिक हैं जितनी सौ साल पहले थीं। कहानियों के अतिरिक्त प्रेमचंद ने चैदह उपन्यास और अनगिनत निबंध लिखे। उन्होंने अन्य भाषाओं की कुछ पुस्तकों को भी हिन्दी में अनुदित किया।
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