₹240.00
MRPGenre
Literature
Print Length
236 pages
Language
Hindi
Publisher
Rajpal & Sons
Publication date
1 January 2017
ISBN
9789386228338
इन कहानियों में यादें हैं और विस्मृतियां भी, विश्वास कर लेने का साहस है तो अविश्वास का सलीका भी, मिठास है तो कसैलापन भी है। ऊपर से शांत और एकसार दिखने वाली सतह को स्वदेश दीपक इस तरह उधेड़ते हैं कि भीतर का सारा विद्रूप, सारी दरारें और बदसूरती साफ दिखने लगती है। सत्ता और ताकत का ज़रा भी सुराग दिखाई दे, उनकी निगाह उसी तरफ उठती है और बेध देती है। आलोचना और व्यंग्य की इतनी गहरी धार दुर्लभ है।
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